संपादकीय

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सत्य पर असत्य की विजय के रूप में मनाया जाने वाला दशहरा कई रूपों में समृद्धिदायक त्योहार है। धर्मग्रंथों में अश्विन यानी क्वार माह के शुक्लपक्ष की दशमी के दिन अलग-अलग समय पर दो घटनाओं का जिक्र मिलता है, जिन्हें हम महिषासुर मर्दन और रावणवध के नाम से जानते हैं। पत्नी सीता को रावण के चंगुल से बचाने के लिए श्रीराम ने दशानन का वध किया और इस तरह अधर्म पर धर्म की जीत हुई, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस कहानी के अलावा दशहरे से जुड़ी कुछ और भी बातें हैं, जिसे ज्यादा लोग नहीं जानते। दशहरे से कई रीत‌ि-रिवाज भी जुड़े हैं, जिन्हें पिछले कई सालों से लोग मानते आ रहे हैं। मान्यताओं के अनुसार, रावण के वध और लंका विजय के प्रमाण स्वरूप श्रीराम सेना लंका की राख अपने साथ ले आई थी, इसी के चलते रावण के पुतले की अस्थियों को घर ले जाने का चलन शुरू हुआ। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि धनपति कुबेर के द्वारा बनाई गई स्वर्णलंका की राख तिजोरियों में रखने से घर में स्वयं कुबेर का वास होता है और घर में सुख समृद्ध‌ि बनी रहती है। यही कारण है कि आज भी रावण के पुतले के जलने के बाद उसके अस्थि-अवशेष को घर लाना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं करती हैं। सनातन संस्कृति में दशहरा विजय और अत्यंत शुभता का प्रतीक है। बुराई पर अच्छाई और सत्य पर असत्य की विजय का पर्व, इसीलिए इस पर्व को विजयादशमी भी कहा गया है। दक्षिण भारत के द्रविड़ ब्राह्मणों में रावण के पुतले के दहन से पहले उसका पूजन करने की परंपरा है। रावण में त्रिकाल दर्शन की क्षमता थी। उसके ज्ञान और विद्वता की प्रशंसा स्वयं श्रीराम ने भी की। यही वजह है कि द्रविड़ ब्राह्मणों में रावण पूजन की परंपरा को उत्तम माना गया है। कई जगह पर रावण दहन के दिन उपवास रखने की भी प्रथा है। दशहरे पर मनुष्य अपनी बुराइयों को छोड़ सकता है और इसके सर्वसिद्धि मुहूर्त में अपने पूरे वर्ष को खुशहाल बनाने के लिए जरूरी उपाय कर सकता है। इन उपायों में शमी वृक्ष की पूजा, घर में शमी का पेड़ लगाकर नियमित दीपदान करना शुभ माना जाता है। दशहरे के दिन कुबेर ने राजा रघु को स्वर्ण मुद्रा देते हुए शमी की पत्तियों को सोने का बना दिया था, तभी से शमी को सोना देने वाला पेड़ माना जाता है। वहीं, दशहरे के दिन नीलकंठ दर्शन को भी शुभ माना जाता है। तो आपके लिए दशहरा मंगलमय हो। उम्मीद है आप भी बुराइयों को त्यागने, अच्छाइयां को अपनाने का संकल्प लेंगे।