स्वास्थ्य

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उपवास से कम हो सकता है मधुमेह

उपवास के दौरान नियोजित तरीके से खान-पान रखने से टाइप-2 मधुमेह को कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसा करने में डॉक्टर तीन मरीजों में इंसुलिन की जरूरत को कम करने में सफल रहे हैं। टाइप-2 मधुमेह में वैसे तो जीवनशैली में बदलाव करने से फायदा मिलता है, लेकिन ऐसा करके हमेशा ही रक्त शर्करा स्तर को नियंत्रण में रख पाना संभव नहीं है। कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी और स्कारबोरो अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक, 40 से 67 वर्ष के आयुवर्ग के तीन व्यक्तियों ने नियोजित तरीके से उपवास रखा। ये मरीज रोग पर नियंत्रण के लिए कई दवाइयां ले रहे थे और साथ ही इंसुलिन का भी इस्तेमाल कर रहे थे। 'जर्नल बीएमजे केस रिपोर्ट में डॉक्टरों ने बताया कि टाइप-2 मधुमेह के अलावा वह उच्च रक्तचाप तथा उच्च कोलेस्ट्रॉल की समस्या से भी ग्रसित थे। इनमें से दो लोगों ने हर एक दिन के बाद पूरे 24 घंटे का उपवास रखा। जबकि, तीसरे ने सप्ताह में तीन दिन तक उपवास रखा। इस दौरान उन्होंने बहुत ही कम कैलोरी वाला पेय और खाद्य पदार्थ इस्तेमाल किया। उन्होंने लगभग दस महीने तक इसे जारी रखा। इसके बाद उनकी रक्त शर्करा, वजन आदि की फिर से जांच की गई। जांच में पाया गया कि उपवास शुरू करने के महीने भर के भीतर ही तीनों की इंसुलिन की आवश्यकता कम पाई गई। वहीं दो व्यक्तियों ने मधुमेह संबंधी अन्य दवाएं लेने की जरूरत नहीं पड़ी। जबकि तीसरे ने चार में से तीन दवाइयां लेना बंद कर दिया। तीनों के वजन में 18 फीसदी तक कमी पाई गई।