साक्षात्कार

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आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा

बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा साक्षात्कार कम ही देते हैं। उनका ज्यादातर समय हिमाचल प्रदेश के मैकलोडगंज में अपने आवास पर बीतता है, जहां वे तिब्बत की निर्वासित सरकार को अनौपचारिक सलाह देते रहते हैं। इसके अलावा वे दुनिया भर में घूम-घूमकर व्याख्यान देते हैं। उनका मानना है कि चीन में सबसे ज्यादा बौद्ध धर्म के अनुयायी रहते हैं, लेकिन बौद्ध धर्म के साक्ष्य और प्रमाण सबसे अधिक भारत में देखने को मिलते हैं। प्रस्तुत है दलाई लामा से सृजनयात्रा की खास बातचीत- - आप अब भी खुद को भारत में शरणार्थी मानते हैं? नहीं। मैं भारत सरकार का सबसे पुराना मेहमान हूं। वर्षों से तिब्बत और भारत का आपसी रिश्ता बहुत करीबी रहा है। मैंने भारत को हमेशा अपना गुरु माना है। मैं खुद को नालंदा परंपरा का शिष्य मानता हूं। इसीलिए भारत मेरा आध्यात्मिक निवास है। भारत में मुझे कई आध्यात्मिक गुरुओं, विद्वानों और वैज्ञानिकों से मिलने का सुअवसर मिला है। - इसके बाद भी क्या वापस तिब्बत लौटना चाहेंगे? हां। क्योंकि एक तिब्बती होने के नाते वहां के 90 फीसदी से ज्यादा लोग मुझ पर भरोसा रखते हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि मैं तिब्बत में बौद्ध धर्म की सेवा कर पाऊंगा। लेकिन कई कट्टरपंथी नहीं चाहते कि मैं वापस लौटूं। इसीलिए वे जान-बूझकर यह धारणा फैलाते हैं कि दलाईलामा अलगाववादी हैं। - आप चाहेंगे कि चीन से बातचीत में भारत आपकी मदद करे? - तिब्बत, भारत की पहली रक्षा पंक्ति है और यह तब तक ऐसे ही रहेगी जब तक कि तिब्बती संस्कृति और आध्यात्मिकता अपनी जगह कायम है। भारत हमारा गुरु है और तिब्बत उसका चेला है। चेले को अगर कोई दिक्कत हो तो गुरु की जिम्मेदारी बनती है कि वह उसे हल करे और पूरा सहयोग दे। - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आपका कैसा रिश्ता है? मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे उस समय राज्य में कुछ पुराने अवशेष मिले थे। वे नालंदा जैसे ढांचे थे, जहां भिक्षु रहा करते थे। उसी समय मैं गुजरात गया था और उनसे मिला था। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वे काफी सक्रिय हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद मैं उनसे एक बार ही मिला हूं। मेरी यह मुलाकात सुखद रही। - क्या आप मानते हैं कि भारत में असहिष्णुता बढ़ती जा रही है? मुझे नहीं लगता। हो सकता है कि कुछ लोग खुराफात कर रहे हों, लेकिन मोटे तौर पर भारत में मजहबी सद्भाव अब भी कायम है। हमें लोगों को लगातार याद दिलाते रहना होगा कि यह कायम रहना चाहिए। - लोग दुआ करते हैं आप 113 साल जिंदा रहे। 113 ही क्यों? मैंने सपने में देखा था कि मैं 113 साल जिंदा रहूंगा, लेकिन अब इस पर शक होता है। मैं पहले 90 और फिर 100 साल का होने की कामना करता हूं, लेकिन उसके बाद मुझे संदेह है। ताइवान और तिब्बत के जो चिकित्सक मेरी शारीरिक स्थिति का जायजा रखते हैं, उनके मुताबिक बहुत संभव है कि मैं 100 साल तक जिंदा रहूं। - आप ही यह तय करेंगे कि अगला दलाई लामा कौन होगा? मैंने तो 1969 में ही कह दिया था कि दलाई लामा का पद महत्वपूर्ण नहीं है, जितना क‌ि यह महत्वपूर्ण है कि बौद्ध धर्म के अनुयायियों को बौद्ध धर्म का अधिकतम ज्ञान हो। दलाई लामा नाम की संस्था जारी रहेगी या नहीं, यह फैसला पूरी तरह तिब्बती जनता का होगा। मुझे 15वें दलाई लामा की बहुत चिंता नहीं है। कभी-कभार तो मुझे लगता है कि 15वें दलाई लामा की मुझसे कहीं ज्यादा चिंता चीन सरकार को है। - आप ऐसा मानते हैं कि अमेरिका आपका हितैषी है? बिल्कुल। अमेरिका ने पहले भी हमारा साथ दिया और मुझे उम्मीद है कि सबसे बड़ा ताकतवर देश होने के नाते वह अन्य छोटे देशों की भी मदद करेगा। अमेरिका दुनिया का नेतृत्व करने वाला देश जो है। हमने तिब्बत के मुद्दे को लेकर जब यूएन में आवाज उठाई थी तब अमेरिका ने सहानुभूति दिखाते हुए हमारी मदद की। - आपकी नजर में बुद्ध के सिद्धांत कितने प्रासंग‌िक हैं? हजारों वर्ष पुरानी भारत की संस्कृति में आज भी नालंदा परंपरा देखने को मिलती है। जितने भी विद्वान यहां पर बौद्ध धर्म का अध्ययन करने के लिए आए। उन्होंने बुद्ध के सिद्धांतों को समझा, परखा और तब विश्वास किया। बौद्ध धर्म की शिक्षा का अनुसरण करने के साथ अगर तार्किक दृष्टि से उसे समझा जाएगा तो वह अधिक प्रभावी होगा। - भारतीय संस्कृति ने आपको कितना प्रभावित किया है? भारतीय संस्कृति सबसे प्राचीन है। अहिंसा, करुणा और मैत्री का मंत्र भी इसी संस्कृति ने विश्व को दिया है। लिहाजा आज जरूरत है भारतीय संस्कृति के इस मंत्र को विश्व भर में फैलाने की। ताकि एक-दूसरे के प्रति जो नफरत फैल रही है उसे समाप्त किया जा सके। अपनी इसी संस्कृति की बदौलत भारत विश्व की बड़ी ताकत बन रहा है। - आपकी नजर में सबसे बड़ी वैश्व‌िक जरूरत क्या हैं? आज की सबसे बड़ी जरूरत विश्व में आपसी प्रेम की है। इसी से मुल्कों के बीच की दुश्मनी को दूर किया जा सकता है। एक शांत और नए विश्व का निर्माण किया जा सकता है। भारत ने हमेशा प्रेम का संदेश पूरी दुनिया को दिया है। भारत में सबसे ज्यादा विभिन्न संप्रदाय के लोग रहते हैं। ऐसे में भारत अहिंसा, करुणा और मैत्री का संदेश देने वाला ऐसा देश है जो दुनियाभर को एक राह दिखा रहा है। - आख‌िरी सवाल, कहते हैं आपको संस्कृत पसंद है। भारतीय संस्कृति और संस्कृत का प्रचार-प्रसार आज के समय में बहुत आवश्यक है। क्योंकि संस्कृति और संस्कृत का भी एक बड़ा रिश्ता है। फिर संस्कृत और संस्कृति भारत की पहचान है। इनके उन्नयन और प्रसार की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है। मैं संस्कृत में उतना विद्वान नहीं हूं, लेकिन संस्कृत मुझे आनंदित करती है।