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कविता : हिमांशु ग्रेवाल

छोड़-छाड़ कर दवेष-भाव को, मीत प्रीत की रीत निभाओ, दिवाली के शुभ अवसर पर, मन से मन का दीप जलाओ…
क्या है तेरा क्या है मेरा, जीवन चार दिन का फेरा, दूर कर सको तो कर डालो, मन का गहन अँधेरा, निंदा नफरत बुरी आदतों, से छुटकारा पाओ…
दिवाली के शुभ अवसर पर, मन से मन का दीप जलाओ…
खूब मिठाई खाओ छक कर, लड्डू, बर्फी, चमचम, गुझिया…
पर पर्यावरण का रखना ध्यान, बम कहीं न फोड़ें कान…
वायु प्रदुषण, धुएं से बचना, रौशनी से घर द्ववार को भरना…
दिवाली के शुभअवसर पर, मन से मन का दीप जलाओ…
चंदा सूरज से दो दीपक, तन मन से उजियारा कर दें…
हर उपवन से फूल तुम्हारे जब तक जियो शान से, हर सुख, हर खुशहाली पाओ, दिवाली के शुभ अवसर पर, मन से मन का दीप जलाओ…
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कविता :दीपमु

सरहदों में तो चल रहीं हैं गोलियाँ ,
पटाखों की गुंज थोड़ी कम कर देना ..
आंगन में तो फैल रहीं है रोशनीयाँ,
शहीदों के नाम भी एक दीया कर देना .!